ध्यातव्य

लौह भस्म शतावरी, मिला भृंगराज के अर्क
मधु व घी के साथ लें, बहुत पड़ेगा फर्क।
त्रिफला पीपल सौंठ को, लें चित्रक के साथ
मधु गिलोय घृत है अमृत, करें न खाली हाथ।
ताम्र भस्म गिलोय व, शुद्ध गन्धक घृत मेल
गेठी लोहसव शतावरी, करे जिन्दगी खेल।
पलाश-तैल मधु-दूध का, करते रहें प्रयोग
बिल्व-तैल का नस्य लें, कटेंगे सारे रोग।
काँगनी-पत्र-रस जोड़कर, त्रिफला दूध के साथ
पीपल शतावरी सौंठ का, पीते रहना क्वाथ।
भिलावा-तिल सेवन करें, अपमृत्यु न पास
वृद्धावास्था भी दूर हो, उरमन हो न निराश।
मेउड़ की जड़ पीसकर, लें चूर्ण बनाकर पात
स्वरस रोग व मृत्यु का, नाश करे हर घात।
ब्राह्मी चूर्ण संग दूध का, सेवन करना यार
चेहरे पे झुर्री नहीं, केश कृष्ण रंग-दार।
उड़द पीपल चावल प्रमुख, जौ गेंहू घृत मेल
दुग्ध के संग लें शर्करा, कुछ ना हो बेमेल।
आम्र स्वरस भावित करें, मधु-घृत-शर्करा-साथ
बिल्वादि बेल सोनापाठा, पाटन अरणी लें हाथ।।
पाचन रखना शुद्ध नित, पिप्पली गिलोय संग सोंठ
ज्वर आये तो आँवला, अभया पीपल ले गोंठ।।

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